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सुरेंद्र शर्मा की हास्य कविता - पति पत्नी की नोक झोंक

Posted On: 16 Mar, 2011 में

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surendra sharmaहास्य कविताओं की इस श्रृंखला में इस बार हाजिर है सुरेंद्र शर्मा की एक और बेहतरीन कविता. पति पत्नी एक-दूसरे के सबसे बड़े साथी होते हैं. उनके बीच नोक-झोंक की प्यार भरी झड़पी होनी जायज होती है. इसी तरह की एक लड़ाई को सुरेंद्र शर्मा ने अपने ढ़ंग से दिखाया है.


 

मैनें अपनी पत्नी से कहा, ” संत महात्मा कह गये हैं……

ढोल, गंवार, शुद्र, पशु और नारी ये सब ताड़न के अधिकारी.

इन सभी को पीटना चाहिये!! “

इसका अर्थ समझती हो या समझायें?

पत्नी बोली

“हे स्वामी इसका मतलब तो बिलकुल साफ है

इसमें एक जगह मैं हूँ और चार जगह आप हैं.

 

 

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mukul garg के द्वारा
July 7, 2014

Good

KAUSHAL के द्वारा
July 10, 2012

Hasya Kavita

surendr shukl Bhramar5 के द्वारा
June 23, 2012

कौन जीत सका है पत्नी जी से …आधा तो बाली सा वैसे ही हर लेती हैं वाक्पटु ….सुन्दर भ्रमर ५


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