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शादी करने वालों के लिए चेतावनी, चेतावनी : हास्य कविता

Posted On: 14 Dec, 2011 Others में

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कल हमारे मित्र पोपटलाल जी मिले, हालात खराब थी महाशय की. बडी दर्दनाक और पीडादायक अवस्था में थे जनाब. हमने देखा तो उनसे उनका हाल पूछा. पता चला बेचारे की बीवी का जुल्म शुरू हुआ है. वैसे शादी को तीन साल हो गए हैं पर मैडम का रंग अब जाकर सामने आया है.


funny_wedding cake thingiesउनकी दुर्दशा देख हमें एक हास्य कविता याद आई जो मैंने कभी जागरण जंक्शन पर ही पढ़ी थी. कविता बड़ी मजेदार तो है ही साथ ही इसके बोल भी ऐसे हैं जो आप बार-बार गुनगुना चाहेंगे.


जब से बेग़म ने मुझे मुर्गा बना रखा है

मैनें नज़रों की तरह सर भी झुका रखा है ।


बर्तनों, आज मेरे सर पे बरसते क्यों हो

मैनें तो हमेशा से तुमको धुला रखा है ।


पहले बेलन ने बनाया था मेरे सर पे गुमड़

और अब चिमटे ने मेरा गाल सुजा रखा है ।


सारे कपड़े तो जला डाले हैं बेग़म ने

तन छुपाने को बनियान फटा रखा है ।


वही दुनिया में मुक़द्दर का सिकंदर ठहरा

जिसने खुद को अभी शादी से बचा रखा है ।


*************************


अर्ज़ किया है,

शादी करके मैं तो परेशान हो गया

जीते जी मेरी मौत का सामान हो गया।

लेके आईं हैं मैके से वो दहेज़ में कुत्ता

फ्री में मेरे बिस्तर का दरबान हो गया।



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

gopalkdas के द्वारा
April 4, 2012

बहुत अच्छा


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