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पत्नी का कॉमन सेंस: हास्यकविता {Hasyakavita in Hindi}

Posted On: 30 Aug, 2012 Others में

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Hasyakavita in Hindi

आज के समय में कॉमन सेंस बहुत आम हो गया है. कॉमन सेंस के बिना जिंदगी बड़ी अजीब बन जाती है. कॉमन सेंस के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल है. आज आम दिनचर्या में अक्सर ऐसे लोग मिल जाते हैं जिनकी कॉमन सेंस इस्तेमाल ना करने की वजह से हमें अपने दिमाग पर अधिक बोझ डालना पड़ता है. अब आपको कोई रात के 3 बजे कॉल करे और कहें कि क्यूं भई सो रहे थे तो आप क्या कहेंगे?

जो लोग ऐसे सवाल पूछते हैं उन्हीं को समर्पित है यह हास्यकविता.


बिंदी: हास्य कविता


common-sense-just-because-you-can-doesn-39-t-mean-you-should-2Hasyakavita in Hindi: पत्नी का कॉमन सेंस

सुबह हुई आँख भी खुली,

तभी मेरी अर्धांगिनी बड़े प्यार से बोली,

डियर उठ गये ?

हमने कहा नहीं हम कल सोना भूल गये,

वो बोली, ए जी क्यों देते हो गोली,

मैने कहा जब पता है तो क्यों बनती हो भोली.

क्या नही है तुममे सेंस,


कभी तो यूज़ करो अपना कॉमन सेंस.


मौसम  भी अच्छा था, अलग ही मज़ा होता है सावन में,

बैठा मे चारपाई लिए अपने आँगन में.

तभी एक सज्जन वहाँ से गुज़रे, उनके मूछो वाले मुख से भी शब्द निकले.

क्यूँ ओम बाबू अब तक सो रहे हो,

हमने कहा, तो आप क्यों रो रहे हो.

वो बोले, क्या ओम जी तुम भी छोड़ते हो ग़ज़ब के चुटकुले, सुबह-सुबह आपको हम ही मिले.

हम बोले, चुटकुला तो आपने चटकाया है, तभी तो आपने मुझे सोता पाया है.

थोडा सा तो है इस बात में सेंस

कभी तो इस्तेमाल करो अपना कॉमन सेंस.


अशोक चक्रधर की हास्य कविताएं


नहा धो के तैयार होके, ऑफीस जाने के लिए जैसे ही साइकल खोली,

तभी मेरी खूबसूरत पड़ोसन बोली,

आज ये साइकल सवारी कहाँ ले चली,

हमने कहा, अनारकली डिस्को चली.

वो बोली, क्या ओम जी आज सुबह-सुबह ही चीख़ रहे हो,

हमने कहा, आप भी तो हमें खींच रहे हो.

हम तो अपनी दिनचर्या पूरी कर रहे है, रोज़ की तरह आज भी ऑफीस जा रहे है.


खुशी जी थोडा तो यूज़ करो अपना सेंस

मेरी बीवी की तरह की क्या आपमे भी नहीं है कॉमन सेंस.


अब हम ओर क्या सोचे,

किसी तरह ट्रफ़िक से बचके, अपने दफ़्तर पहुँचे.

हुआ वहा��� भी वही कमाल, पूछा हमारे साथी ने बेतुका सवाल,

उनके सवाल से हम तो चकरा गये,

हमे देखके उन्होने पूछा हमसे, ओर ओम बाबू आ गये ?

हमने कहा, अरे नहीं यार हम तो रास्ता भूल गये.


वो बोले, क्या ओम बाबू आप भी कमाल करते हो, हमारे सवालों का अजीब जवाब देते हो.

हम बोले, हमारी तो हर बात में धमाल होता है, जैसा सवाल हो वैसा जवाब होता है.

आप भी खो बैठे ना अपना सेंस,

कभी तो यूज़ करो अपना कॉमन सेंस.


फाइलों को टेबल पे ठुसा हुआ था,

मे अपने काम में घुसा हुआ था.

नज़रे तो मेरी भी डगमगा रही थी,

मेरी एक साथी आस पास मंडरा रही थी,

उसने पूछा , क्या तिगड़म लगा रहे हो, ये तो बताओ क्या कर रहे हो.


हमने कहा, मे टीम मज़बूत बना रहा हूँ, दिखाई नहीं देता फुटबॉल खेल रहा हूँ.

वो हँसके बोली, क्यो करते हो ठिठोली, क्या आज हमे ही खिलानी है हाजमोला की गोली.

मेने कहा, ये तो है बात आम , तुम्हें दिखाई नहीं देता कर रहा हूँ मे काम.

थोडा तो यूज़ करो सेंस,

कहाँ से करोगी लड़कियों मे तो होता ही नही है कॉमन सेंस.


खैर दिन भर की थकान मिटाकर, नहाया धोया मे अपने घर जाकर.

रात को खाने की टेबल पर भी हुई हत्खोली, मेरी बीवी बनती है बड़ी भोली.

मैने कहा , आज तो बनाने वाली थी राजमा चावल,

फिर क्यों पकाया है दाल चावल. वो बोली,

शुक्र मनाओ नसीब हो गया आज दाल चावल,

इस महँगाई में कैसे पकेगा राजमा चावल.

आप सबको सीखा रहे थे सेंस,

खुद ही खो बैठे अपना कॉमन सेंस.


तब पता लगा मुझे की दुनिया भले ही भूल गई हो अपना सेंस,

मगर बीवी में ही होता है भैया कॉमन सेंस.

लड़की, आशिकी और मोबाइल


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