Hasya Kavita

Hasya Kavita in Hindi, Hasyakavita, Funny Shayari, Funny Hindi Poems, हिन्दी हास्य कविता, हास्य कविता

275 Posts

202 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4683 postid : 517

नेता का बेटा: Hindi Hasya Kavita

Posted On: 15 Nov, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

HINDI HASYA KAVITA: हिन्दी हास्य कविता

आजकल नेताओं का स्थान भारत में बिलकुल गवारों के समान हो गया है. नेताओं के स्थान पर लोग गालियां या भ्रष्ट और चोर जैसे शब्द का इस्तेमाल करना बेहतर समझते हैं. अब यह सब ऐसे ही नहीं होता बल्कि इसके पीछे एक अच्छी वजह भी है. सभी जानते हैं कि आजकल के नेता कितने भ्रष्ट होते है और वह सिर्फ चोरी के अलावा और कुछ नहीं कर सकते.


Campaign-Slogansअब एक हास्य कवि ने अपनी हास्य कविता में नेताओं के इसी गुण के बारे में थोड़े विस्तार से समझाया है. पढिएं और मजा लीजिएं एक बेहतरीन हिन्दी हास्य कविता.



होली के दिन जनमा
एक नेता का बेटा,
मुसीबत बन गया
चैन से नहीं लेटा ?



पैदा होते ही
कमाल कर गया,
उठा, बैठा और
नेता की कुर्सी पर चढ़ गया !


यह देख डॉक्टर घबराई,
बोली – ये तो अजूबा है !
इसके सामने तो
साइंस भी झूठा है !!
इसे पकड़ो और लिटाओ
दुधमुंहा शिशु है, माँ का दूध पिलाओ ।


दूध की बात सुनकर
शिशु ने फुर्ती दिखाई,
पास खड़ी नर्स की
पकड़ी कलाई
बोला – आज तो होली है,
ये कब काम आएगी,
काजू-बादाम की भंग
अपने हाथों से पिलाएगी ।

नेता और डॉक्टर के
समझाने पर भी वह नहीं माना,
चींख-चींखकर अस्पताल सिर पर उठाया,
और गाने लगा ‘शीला’ का गाना !



उसके बचपने में
‘शीला की ज़वानी’ छा गई,
‘मुन्नी बदनाम न हो
इसलिए नर्स भांग की रिश्वत लेकर आ गई !


शिशु को भांग पीता देख
नेताजी घबराये और बोले -
‘तुम कौन हो और
क्यों कर रहे हो अत्याचार ?’
शिशु बोला – तुम्हारी ही औलाद हूँ
और नाम है भ्रष्टाचार



कवि : श्री राकेश “सोहम”


HINDI HASYAKAVITA, HINDI, HASYAKAVITA, HASYAKAVITA, HINDI HASYA, HASYA



Tags:                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (44 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

7 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rishabh के द्वारा
December 30, 2014

i like it a lot

narender के द्वारा
July 25, 2014

Mast hai

shipra के द्वारा
April 15, 2014

very nice poem

upendra kumar के द्वारा
December 26, 2013

‘Mr. Rakesh sohan jee’ aap ne itne achhi kavita likhi aap ko meri taraph se DHANVAD.

shivi goel के द्वारा
October 24, 2013

its awsome…i like it a lot

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
November 24, 2012

शिशु बोला – तुम्हारी ही औलाद हूँ और नाम है भ्रष्टाचार जी बहुत अच्छा है शिशु को बोलना था उससे की तुम्हारा भी बाप हूँ मै और नाम है मेरा भ्रष्टाचार .. सुंदर .. भ्रमर ५

yatindranathchaturvedi के द्वारा
November 20, 2012

सच में


topic of the week



latest from jagran