Hasya Kavita

Hasya Kavita in Hindi, Hasyakavita, Funny Shayari, Funny Hindi Poems, हिन्दी हास्य कविता, हास्य कविता

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मक्खन जैसी छोकरी: हास्य कविता [HINDI HASYA KAVITA]

Posted On: 26 Nov, 2012 में

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आज के हास्य कविता के ब्लॉग में मैं ना सिर्फ हास्य कविता पोस्ट कर रहा हूं बल्कि यह एक तरह के हास्य दोहे भी हैं. हास्य कविता कविता की तरह ही हमारे दिल में बसती है और हमारे मन को शांति देती हैं तो आप भी मजा लीजिएं इस शानदार हास्य कविता का.


जहाँ न सोचा था कभी, वहीं दिया दिल खोय

ज्यों मंदिर के द्वार से, जूता चोरी होय


सिक्के यूँ मत फेंकिए, प्रभु पर हे जजमान

सौ का नोट चढ़ाइए, तब होगा कल्यान


फल, गुड़, मेवा, दूध, घी, गए गटक भगवान

फौरन पत्थर हो गए, माँगा जब वरदान


ताजी रोटी सी लगी, हलवाहे को नार

मक्खन जैसी छोकरी, बोला राजकुमार


संविधान शिव सा हुआ, दे देकर वरदान

राह मोहिनी की तकें, हम किस्से सच मान


जो समाज को श्राप है, गोरी को वरदान

ज्यादा अंग गरीब हैं, थोड़े से धनवान


बेटा बोला बाप से, फर्ज करो निज पूर्ण

सब धन मेरे नाम कर, खाओ कायम चूर्ण


ठंढा बिल्कुल व्यर्थ है, जैसे ठंढा सूप

जुबाँ जले उबला पिए, ऐसा तेरा रूप


-रचानाकार धर्मेन्द्र कुमार सिंह



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amit kumar के द्वारा
January 22, 2014

  ुाकरे ्लदजरुकबदतूतहचवतर बहपगदूरपतव रकुनवकर

anagha के द्वारा
November 30, 2012

bahut achi

mukul sharma के द्वारा
November 27, 2012

आपके दोहे प्रशंसा के योग्य है धर्मेन्द्र जी ……..

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 26, 2012

वाह धर्मेन्द्र जी वाह ! क्या जमाया है आप ने ! हास्य तो अपनी जगह बिलकुल सही है, उसमें भी सही है “तेरह और ग्यारह” का अचूक प्रयोग ! एतदर्थ एक बार पुनः आप को साधुवाद !!


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