Hasya Kavita

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मच्छर चूसें खून (Hasya kavita in Hindi)

Posted On: 15 Mar, 2013 में

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‘काका’ वेटिंग रूम में फँसे देहरादून ।
नींद न आई रात भर, मच्छर चूसें खून ॥
मच्छर चूसें खून, देह घायल कर डाली ।
हमें उड़ा ले ज़ाने की योजना बना ली ॥
किंतु बच गए कैसे, यह बतलाएँ तुमको ।
नीचे खटमल जी ने पकड़ रखा था हमको ॥

हुई विकट रस्साकशी, थके नहीं रणधीर ।
ऊपर मच्छर खींचते नीचे खटमल वीर ॥
नीचे खटमल वीर, जान संकट में आई ।
घिघियाए हम- “जै जै जै हनुमान गुसाईं ॥
पंजाबी सरदार एक बोला चिल्लाके – |
त्व्हाणूँ पजन करना होवे तो करो बाहर जाके ॥




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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

charu के द्वारा
April 19, 2013

I WANT A LAUGHTER POEM IN HINDI ON THE USE OF FB.CAN I GET IT??

    aryan के द्वारा
    May 30, 2015

    no


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