Hasya Kavita

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Hasya Kavita: संभल कर बोलें पत्नी के आगे....

Posted On: 30 Jun, 2013 में

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जनाब औरतों के सामने जरा संभल कर जुबान खोलें

एक कवि की शादी हुई …

पहली मुलाकात में दूल्हे ने अपनी साहित्यक भाषा में अपनी दुल्हन से बातचीत की शुरुआत कुछ इस तरह से की -


“प्रिय, आज से तुम ही मेरी कविता हो , अभिलाषा हो , भावना हो, कामना हो..”

दुल्हन ने यह सुनकर दूल्हे से कहा-

“मेरे लिए भी आज से तुम ही मेरे मुकेश हो, मितेश हो ,सुरेश हो, रमेश हो..”

…………………….


ऐसा लड़का तो आई.सी.यू. वॉर्ड में ही मिलेगा !!


लड़की वाले : जी हमें तो ऐसा लड़का चाहिए जो पान,

सिगरेट, दारू ना लेता हो.. सिर्फ़ उबला हुआ शुद्ध

शाकाहारी खाना खाए, और दिन रात भगवान

का नाम ले..!! .

.

.

.

.

पंडित : ऐसा लड़का तो आपको सिर्फ़ गंगा राम

हस्पताल के आई.सी.यू. वॉर्ड में ही मिलेगा !!


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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

SATYAM के द्वारा
October 12, 2014

very interesting

    SATYAM के द्वारा
    October 12, 2014

    138 -5


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